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संगठन की ताकत पहचानें, यह प्रेरक कथा आपकी आंखें खोल देगी

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                                       संगठन की ताकत   एक आदमी था, जो हमेशा अपने संगठन में सक्रिय रहता था, उसको सभी जानते थे,बड़ा मान सम्मान मिलता था। अचानक किसी कारणवश वह निष्क्रीय रहने लगा, मिलना-जुलना बंद कर दिया और संगठन से दूर हो गया। कुछ सप्ताह पश्चात् एक बहुत ही ठंडी रात में उस संगठन के मुखिया ने उससे मिलने का फैसला किया। मुखिया उस आदमी के घर गया और पाया कि आदमी घर पर अकेला ही था। एक बोरसी में जलती हुई लकड़ियों की लौ के सामने बैठा आराम से आग ताप रहा था। उस आदमी ने आगंतुक मुखिया का बड़ी खामोशी से स्वागत किया।     दोनों चुपचाप बैठे रहे। केवल आग की लपटों को ऊपर तक उठते हुए ही देखते रहे। कुछ देर के बाद मुखिया ने बिना कुछ बोले, उन अंगारों में से एक लकड़ी जिसमें लौ उठ रही थी (जल रही थी) उसे उठाकर किनारे पर रख दिया। और फिर से शांत बैठ गया। मेजबान हर चीज़ पर ध्यान दे रहा था। लंबे समय से अकेला होने के कारण मन ही मन आनंदित ...

भूतिया कुर्सी की कहानी

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                                                                                                        भूतिया कुर्सी की कहानी                    पुराने समय की बात है, रामनगर नाम का एक गांव था। उस गांव के पास  एक घना जंगल था। जिसमें राजू नाम का तांत्रिक रहता था। उस तांत्रिक को अपनी तंत्र विद्या पर बहुत ज्यादा घमंड था कि वह जिसे चाहे उसे अपने वश में कर सकता है और जिसे चाहे उसे मार सकता है। गांव वालों को यह बात पता चल गई की राजू तांत्र...

जब श्री गणेश ने ली 7 बहनों की परीक्षा

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        जब श्री गणेश ने ली 7 बहनों की परीक्षा हिन्दू परिवारों में बच्चों को उनके बचपन से ही भगवान के पूजन और उनके रूप का ज्ञान दिया जाने लगता है। घर में दादी-नानी की कहानियां और धार्मिक कर्मकांडों की बच्चों के मानसिक विकास में अहम भूमिका रही है। यहां पढ़ें सात बहनों की कहानी- जब मैं और छोटा था तब मेरी दादी यह कहानी सुनाया करती थी। एक बार की बात है। सात बहनें थी। छः बहनें पूजा-पाठ करती थीं लेकिन सातवीं बहन नहीं। एक बार गणेशजी ने सोचा मैं इन सात बहनों की परीक्षा करता हूं। वे साधु के रूप में आए और दरवाजा खटखटाया। पहली बहन से गणेशजी ने कहा- मेरे लिए खीर बना दो, मैं बड़ी दूर से आया हूं। उसने मना कर दिया। ऐसे छः बहनों ने मना कर दिया लेकिन सातवीं बहन ने हां कह दी। उसने चावल बीनना शुरू किए और फिर खीर बनाना शुरू की। अधपकी खीर उसने चख भी ली फिर साधु महाराज को खीर दी। साधु ने कहा- तुम भी खीर खा लो। सातवीं बहन ने कहा मैंने तो खीर बनाते-बनाते ही खा ली है। गणेशजी अपने पहले वाले रूप में आए और कहा, 'मैं तुम्हें स्वर्ग ले जाऊंगा'। बहन ने कहा कि मैं अकेले स्वर्ग नहीं जाऊंगी। मेरी छः बह...